416 साल पुरानी भव्य परंपरा: 750 किलो की सोने की पालकी में निकलीं मां चामुंडेश्वरी, मैसूर दशहरा में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
मैसूर (The Jagran News): कर्नाटक के मैसूर में विश्वप्रसिद्ध भव्य दशहरा उत्सव का समापन बुधवार को विहंगम और अलौकिक दृश्य के साथ हुआ। 416 साल पुरानी ऐतिहासिक परंपरा को जीवंत करते हुए 'जंबो सवारी' के दौरान देवी चामुंडेश्वरी को 750 किलो वजनी सोने की पालकी में विराजित कर शाही अंदाज में नगर भ्रमण कराया गया। मैसूर महल से बन्नीमंतप मैदान तक निकली इस सवारी के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
80 किलो शुद्ध सोने से मढ़ी गई है दिव्य पालकी लकड़ी से निर्मित इस भव्य पालकी पर 80 किलो शुद्ध सोने की परत चढ़ाई गई है, जिसका कुल वजन 750 किलोग्राम बैठता है। 'नाड़ा हब्बा' के नाम से विख्यात यह पर्व देवी चामुंडेश्वरी द्वारा महिषासुर पर हासिल की गई विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
12 सजे-धजे हाथी और 54 भव्य झांकियां बनीं आकर्षण का केंद्र इस ऐतिहासिक सवारी में कुल 12 सजे-धजे हाथियों ने भव्य भागीदारी निभाई। उत्सव में कर्नाटक की समृद्ध संस्कृति, इतिहास और विकास को प्रदर्शित करने वाली 54 भव्य झांकियां निकाली गईं, जिनमें 53 झांकियां स्थानीय जिलों की थीं।
ड्रोन शो और रोशनी से जगमगा उठा मैसूर उत्सव की शुरुआत वडियार राजवंश ने 1610 में की थी। बन्नीमंतप मैदान में मशाल परेड और 3,500 ड्रोन्स के अद्भुत लेजर प्रदर्शन ने आसमान को सतरंगी रोशनी से नहला दिया। वहीं, पूरे शहर में करीब 146 किलोमीटर लंबी जगमगाती विद्युत सजावट की गई, जिसने इस ऐतिहासिक पर्व को अविस्मरणीय बना दिया।